Diwya Vatsalya IVF

Hydrocele in Hindi : हाइड्रोसील क्या है ? प्रकार, लक्षण और इलाज

Hydrocele-in-Hindi-हाइड्रोसील-क्या-है-प्रकार-लक्षण-और-इलाज

हाइड्रोसील (Hydrocele in Hindi) एक ऐसी समस्या है जो पुरुषों को हीं प्रभावित करती है, जिसमें पुरुष के टेस्टिकल में पानी भर जाने से सूजन आ जाती है। आमतौर पर यह अपने आप ठीक हो जाता है। आमतौर पर यह वयस्कों की तुलना में शिशुओं में ज्यादा पाया जाता है।

हाइड्रोसील क्या है? (What is Hydrocele in Hindi)

What is Hydrocele in Hindi

हाइड्रोसील की स्थिति मुख्य रूप से पुरुषो में पाई जाती है। यह नवजात शिशुओं में आम है खास करके प्रीमेच्योर बच्चे में देखा जाता है। आमतौर यह एक वर्ष के भीतर हीं उपचार के बिना ठीक हो जाता है। कभी-कभी सूजन या चोट के कारण ज्यादा उम्र में हाइड्रोसील विकसित हो सकता है।

टेस्टिकल (अंडकोष) के आसपास थैली में तरल पदार्थ (पानी) उत्पन्न होने से हाइड्रोसील की समस्या पैदा होती है। जिसकी वजह से टेस्टिकल में दर्द रहित सूजन आ जाती है। आमतौर पर इसके उपचार की जरूरत नहीं होती है, लेकिन ज्यादा सुजन होने पर डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है, क्योंकि ये संक्रमण के भी संकेत हो सकते हैं। हाइड्रोसील एक ऐसी ट्यूब के कारण होते हैं जो पेट को अंडकोष से जोड़ता है, जिससे पेट के तरल पदार्थ अंडकोष में जा सकते हैं। यह नवजात शिशु के अलावा यौवन के दौरान या वयस्क पुरूषों में भी हो सकता है। जिन लोगों में यह समस्या अपने आप ठीक नहीं होती उन्हें डॉक्टर सर्जरी का सुझाव दे सकते है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 3 लाख पुरुषों में हाइड्रोसील का निदान किया गया है।  

हाइड्रोसील के प्रकार (Types of Hydrocele in Hindi)

Types-of-Hydrocele-in-Hindi

हाइड्रोसील दो प्रकार के होते हैं 1) कम्यूनिकेटिंग हाइड्रोसील और 2) नॉन कम्यूनिकेटिंग हाइड्रोसील।

1. कम्यूनिकेटिंग हाइड्रोसील : इस स्थिति में टेस्टिकल (अंडकोष) की थैली पूरी तरह से बंद नहीं हुई होती है, जिसकी वजह से तरल पदार्थ टेस्टिकल की थैली के अंदर चला जाता है और थैली बंद न होने की वजह से तरल पदार्थ अंदर-बाहर आता जाता रहता है। यह नवजात शिशु और बच्चों में देखा जाता है।

2. नॉनकम्यूनिकेटिंग हाइड्रोसील : इस स्थिति में तरल पदार्थ के साथ थैली बंद हो जाती है और शरीर तरल पदार्थ को अवशोषित नहीं कर सकता। यह नवजात शिशु से लेकर किसी भी उम्र के पुरूष को हो सकता है।

हाइड्रोसील क्यों होता है? (Causes of Hydrocele in Hindi)

हाइड्रोसील के लिए की कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। अक्सर नवजात शिशुओं में और प्रीमेच्योर बच्चों में हाइड्रोसील पाया जाता है, जो जन्म के एक साल के भीतर अपने आप ठीक हो जाता है।

  • टेस्टिकल या आसपास के हिस्से में संक्रमण की वजह से तरल पदार्थ का जमा होना।
  • टेस्टिकल में चोट लगना या सूजन आना।
  • प्रोस्टेट कैंसर में भी हाइड्रोसील हो सकता है।
  • टेस्टिस (वृषण) में सूजन
  • इनगुइनल हर्निया की वजह से भी हाइड्रोसील की समस्या हो सकती है।
  • एपिडीडिमाइटिस की सूजन की वजह से तरल पदार्थ का निर्माण हो सकता है।

हाइड्रोसील के लक्षण (Symptoms of Hydrocele in Hindi)

हाइड्रोसील के लक्षण की तीव्रता सभी में अलग अलग हो सकती है। आमतौर पर हाइड्रोसील के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं।

  • टेस्टिकल के आकार में बदलाव
  • तेज बुखार, उल्टी या दस्त होना
  • चलने में असहजता
  • कब्ज होना
  • सेक्स के वक्त समस्या
  • भारीपन का अहसास

हाइड्रोसील का निदान कैसे होता है? (Diagnosis of Hydrocele in Hindi)

• हाइड्रोसील का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले शारीरिक जांच करते हैं। जिसमें बढ़े हुए टेस्टिकल और टेस्टिकल के सुजन वाले हिस्से में दर्द की पुष्टि करते है।

• ट्रांसिल्यूमिनेशन नामक प्रक्रिया के जरिए डॉक्टर टेस्टिकल की जांच कर सकते हैं।

• डॉक्टर पेल्विस और टेस्टिकल के सॉफ्ट टिशू की जांच करने के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

• टेस्टिकल के 3D इमेज़ के लिए डॉक्टर कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन करवा सकते हैं।

• इंफेक्शन का पता लगाने के लिए यूरिन टेस्ट या ब्लड टेस्ट का सुझाव दे सकते है।

• इनगुइनल हर्निया की जांच करने के लिए डॉक्टर पेट और टेस्टिकल पर दबाव डाल सकते हैं।

हाइड्रोसील का इलाज (Treatment of Hydrocele in Hindi)

आमतौर पर नवजात शिशु और बच्चों में हाइड्रोसील की समस्या 1 साल में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन अगर ऐसा न हो तो यह कम्यूनिकेटिंग हाइड्रोसील हो सकता है। इसका इलाज कई तरह से किया जा सकता है।

• एस्पिरेशन और स्किलरोजिंग : इस प्रक्रिया में तरल पदार्थ निकालने के लिए टेस्टिकल में इंजेक्शन की मदद से तरल पदार्थ को बहार निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के बाद डॉक्टर स्किलरोजिंग नामक दवा के जरिए छेद को बंद करते है। हालांकि हाइड्रोसील वापस आने की संभावना भी बनी रहती है।

• लेज़र हाइड्रोसेलेक्टॉमी : यह सबसे लंबी प्रक्रिया होती है। हालांकि इस प्रक्रिया के बाद हाइड्रोसील वापस होने की संभावना कम हो जाती है। इस सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया दिया जाता है। जिसके बाद टेस्टिकल से तरल पदार्थ निकालने के लिए लेजर बीम का उपयोग किया जाता है। हाइड्रोसील वापस न हो इसलिए डॉक्टर थैली को हटा देते है।

• ओपन हाइड्रोसेलेक्टॉमी : इस प्रक्रिया में भी एनेस्थीसिया दिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान टेस्टिकल या कमर के हिस्से में छोटा सा कट लगाया जाता है और फिर सक्शन के माध्यम से तरल पदार्थ को बाहर निकाल देता है। हाइड्रोसील थैली को हटाने से पहले डॉक्टर पेट की गुहा और टेस्टिकल के बीच की नलिका से संचार बंद कर देते हैं।

हाइड्रोसील को घर पर कैसे ठीक करें (Home remedies for Hydrocele in Hindi)

  • वचा और सरसों के पानी का इस्तेमाल करने से टेस्टिकल की सुजन को बढ़ने से रोक सकते हैं।
  • टेस्टिकल पर हल्दी का लेप लगाएं।
  • रो रत्ती सुहागा को फुलाकर रोज गुड़ के साथ खाने से दर्द में राहत मिलती है।
  • एप्सम सॉल्ट से स्नान करने से सूजन कम हो सकती है। हालांकि हाइड्रोसील में दर्द होने पर एप्सम सॉल्ट से स्नान न करें।

हाइड्रोसील से बचाव (Prevention of Hydrocele in Hindi)

हाइड्रोसील को रोका नहीं जा सकता है। हालांकि कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जैसे कि टेस्टिकल पर चोट न लगे। क्रिकेट, कुश्ती, साइकिल जैसे खेल के दौरान टेस्टिकल पर चोट लगने की संभावना ज्यादा रहती है, ऐसे में सुरक्षात्मक गियर का इस्तेमाल कर चोट से बच सकते है और हाइड्रोसील होने की संभावना भी कम हो जाती है।

निष्कर्ष 

हाइड्रोसील (Hydrocele in Hindi) एक ऐसी समस्या है जो पुरुषों को प्रभावित करती है। जिसमें टेस्टिकल में पानी भर जाने से सूजन आ जाती है। आमतौर पर यह अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन सूजन कम न हो और दर्द या पीड़ा का अनुभव हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर परिस्थिति के मुताबिक दवाइयां या फिर सर्जरी का सुझाव दे सकते है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. हाइड्रोसील का इलाज क्या है?

डॉक्टर परिस्थिति के मुताबिक इलाज के लिए कह सकते हैं। आमतौर पर हाइड्रोसील में एस्पिरेशन और स्किलरोजिंग, लेज़र हाइड्रोसेलेक्टॉमी और ओपन हाइड्रोसेलेक्टॉमी की प्रक्रिया के जरिए ठीक किया जा सकता है।

Q2. हाइड्रोसील क्यों हो जाता है?

 हाइड्रोसील टेस्टिकल की थैली में पानी भरने से होता है। इस परिस्थिति को रोका नहीं जा सकता लेकिन टेस्टिकल पर चोट न लगे इसका ध्यान रखकर इस, परिस्थिति से बच सकते हैं।

Q3. हाइड्रोसील बढ़ने से क्या नुकसान होता है?

हाइड्रोसील बढ़ने से चलने में असहजता, दर्द या सेक्स के दौरान समस्या और भारीपन महसूस हो सकता है।

Q4. हाइड्रोसील का ऑपरेशन कब करना चाहिए?

आमतौर पर हाइड्रोसील अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन अगर ठीक न हो तो डॉक्टर परिस्थिति के मुताबिक सर्जरी के लिए सुझाव दे सकते है।

Q5. हाइड्रोसील ऑपरेशन में कितना खर्च आता है?

हाइड्रोसील की लागत उसके इलाज और डॉक्टर के अनुभव के मुताबिक अलग अलग हो सकती है। आमतौर पर हाइड्रोसील के इलाज की लागत 30-80 हजार रुपए के बीच में हो सकती है।

dr-rashmi-prasad

Dr.Rashmi Prasad

Diwya vatsalya mamta IVF rating

Verified & Most Trusted One

Dr. Rashmi Prasad is a renowned Gynaecologist and IVF doctor in Patna. She is working as an Associate Director (Infertility and Gynaecology) at the Diwya Vatsalya Mamta IVF Centre, Patna. Dr. Rashmi Prasad has more than 20 years of experience in the fields of obstetrics, gynaecology, infertility, and IVF treatment.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *