2 Month Pregnancy Symptoms in Hindi: Pregnancy Signs
प्रेगनेंसी हर एक महिला के लिए एक खूबसूरत पल होता है। प्रेगनेंसी की शुरुआत पीरियड्स मिस होने से होती है। इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव भी शुरू हो जाते हैं। जिसकी वजह से महिला को शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बेहद नाज़ुक समय होता है। प्रेगनेंसी के पहले महीने तो कुछ खास लक्षण देखने नहीं मिलते और कभी कभी भ्रमित करने वाले भी होते हैं। कभी कभी तनाव की वजह से भी पीरियड्स मिस हो सकते हैं। इसलिए ऐसे संकेत दिखने पर प्रेगनेंसी किट के साथ ही डॉक्टर का भी संपर्क करें।
प्रेगनेंसी के पहले महीने की तुलना में दूसरे महीने (2 Month Pregnancy Symptoms in Hindi) में कई सारे लक्षण देखने मिलते हैं और समय के साथ यह लक्षण बढ़ने लगते हैं। हर महिला में यह लक्षण अलग अलग हो सकते हैं। प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में भ्रृण का विकास शुरू हो जाता है। जिसे अल्ट्रासाउंड के जरिए देखा जा सकता है।
Diwya Vatsalya Mamta IVF – Best Fertility Center in Patna के सर्वश्रेष्ठ इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ रश्मि प्रसाद एवं उनके टीम के द्वरा हम आपको बताएंगे कैसे 2 महीने के गर्भावस्था के दौरान होने वाले लक्षणों को सही ढंग से समझा जा सकता है। इस ब्लॉग में जानिए सर्वोत्तम प्रजनन क्लिनिक के साथ प्रेगनेंसी की यात्रा में सफलता की कहानी।
2 महीने की गर्भावस्था के मुख्य लक्षण (Key 2 Month Pregnancy Symptoms in Hindi)
In this Article
आप हमारे (2 Month Pregnancy Symptoms in Hindi) ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद आप अछे तरीके से समझ जायेंगे की 2 महीने की गर्भावस्था के मुख्य लक्षण इस बारे में बहुत ही विस्तार से बताने वाले हैं।
गर्भावस्था के दूसरे महीने में HCG हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। जिसकी वजह से कई बदलाव देखने को मिलते हैं।
1. सुबह उठते ही मतली और उल्टी (Nausea and Vomiting) की समस्या होने लगती है। जिसे मॉर्निंग सिकनेस भी कहा जाता है।
2. गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में तेजी से वृद्धि होती है। खास करके प्रोजेस्टेरोन की वजह से थकान और कमजोरी( Fatigue and Weakness) महसूस होती है। यह हार्मोन बच्चे के विकास के लिए जरूरी होता है।
3. गर्भावस्था के दौरान कुछ चीजें खाने (Changes in Appetite)का बहुत मन करता है। इस दौरान गंध के प्रति संवेदनशीलता हो सकती है, जिसकी वजह से कुछ चीजों के लिए अरूचि भी महसूस होती है।
4. दूसरे महीने में भ्रृण के विकास की वजह से बार बार पेशाब (Frequent Urination) जाना पड़ सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी पानी पीना कम न करें। गर्भावस्था के दौरान हाइड्रेटेड रहना जरूरी है।
5. हार्मोनल परिवर्तन के कारण स्तनों में संवेदनशीलता और सूजन (Breast Tenderness and Swelling) देखने को मिल सकती है। निपल के आसपास के क्षेत्र का रंग भी गहरा हो जाता है।
शारीरिक और मानसिक परिवर्तन (Physical and Emotional Changes)
1. वजन में हल्का बदलाव (Slight Weight Changes): गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना आम बात है। हालांकि पहली तिमाही में भूख कम लगने और मॉर्निंग सिकनेस की वजह से कुछ महिलाओं का वजन घट भी सकता है। हालांकि गर्भावस्था के दूसरे महीने आधे से ढाई किलो वजन बढ़ना सामान्य है।
2. मूड स्विंग्स (Mood Swings): गर्भावस्था के दूसरे महीने में शरीर में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन में बदलाव आता है। जिसकी वजह से मूड स्विंग्स आते हैं। इस दौरान बात बात पर चिड़ना, गुस्सा करना जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।
3. हार्मोनल बदलाव का असर (Effects of Hormonal Changes): इस दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से शारीरिक हीं नहीं भावनात्मक परिवर्तन भी देखने को मिल सकते हैं। हालांकि यह परिवर्तन सभी महिलाओं में अलग-अलग हो सकते हैं।
2 महीने में भ्रूण की स्थिति (Baby’s Development in 2 Month Pregnancy in Hindi)
गर्भावस्था के दूसरे महीने बच्चे का शारीरिक विकास शुरू हो जाता है।
1. भ्रूण का आकार और संरचना (Size and Structure of the Embryo): इस महीने भ्रृण की लंबाई 2.5 से 3.8 सेंटीमीटर हो जाती है। इस दौरान भ्रृण का वजन 907 ग्राम हो गया होता है। उसकी आकृति एक मूडी हुई ट्यूब जैसी होती है।
2. अंगों का विकास (Development of Organs): इस दौरान बच्चें के हाथ, पैर, हड्डियां, मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डियां, हृदय, फेंफड़ों, चेहरे इत्यादि का विकास शुरू हो जाता है।
3. दिल की धड़कन सुनाई देना (Heartbeat Detection) : इस दौरान बच्चें के हृदय का विकास हो रहा होता है, इसलिए बच्चे के दिल की धड़कन को ट्रैक करना थोड़ा मुश्किल होता है।
2 महीने में गर्भावस्था के दौरान क्या सावधानियां रखें (Precautions For 2 Month Pregnancy in Hindi)
आहार में बदलाव (Dietary Changes)
जैसे कि इस महीने बच्चे के अंगों का विकास शुरू हो जाता है इसलिए इस महीने डायट का महत्व भी बढ़ जाता है।
- डायट में फाइबर और प्रोटीन से भरपूर आहार शामिल करें, फाइबर के सेवन से कब्ज़ की समस्या नहीं रहती
- इस महीने गर्भस्थ शिशु की हड्डियों का भी विकास होता है इसलिए डेयरी उत्पाद जैसे कि दूध, दहीं, पनीर, पालक का सेवन करें
- हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त पानी पिएं
नियमित व्यायाम (Regular Exercise)
गर्भावस्था के दूसरे महीने हल्का व्यायाम कर सकते हैं, हालांकि इसके बारे पहले बात करना आवश्यक है।
- नियमित 30 मिनट वॉक
- स्वीमिंग
- योगासन
- पिलेट्स
- साइकिलिंग
दवाइयों और डॉक्टर की सलाह (Medication and Doctor Consultation)
इस दौरान डॉक्टर कुछ परिक्षण करने के लिए कह सकते हैं। उस परिक्षण के आधार पर ही डॉक्टर आपको दवाएं का सुझाव दे सकते हैं।
2 महीने में होने वाली समस्याएं और उनका समाधान
1. उल्टी और मतली का समाधान (Managing Nausea and Vomiting): उल्टी से बचने के लिए नींबू पानी पिएं, इसके अलावा इंट्रावीनस तरीके से भी फ्लूड दिए जा सकते हैं। मतली के लिए डॉक्टर एंटीमैटिक दवाएं दे सकते हैं। इसके साथ विटामिन B6 का सुझाव भी दे सकते हैं
2. थकान और नींद की कमी से बचाव (Dealing with Fatigue) : थकान को दूर रखने और एनर्जी बनाएं रखने के लिए संतुलित आहार ले। कैफीन का सेवन करें। हल्का व्यायाम और मेडिटेशन करें।
3. एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या (Acidity and Bloating) : इस समस्या को दूर करने के लिए खाना खाने से एक घंटे पहले एक गिलास पानी में एक चम्मच विनेगर मिलाकर पिएं। इसके अलावा नींबू पानी, नारियल पानी, दहीं, दूध, एलोवेरा जूस पिए।
2 महीने की गर्भावस्था में डाइट प्लान (Diet Plan for 2 Month Pregnancy in Hindi)
गर्भावस्था में क्या खाएं? (What to Eat During Pregnancy)
- इस महीने आयरन की अधिक जरूरत होती है इसलिए आयरन से भरपूर लाल फल, चुकंदर और पालक का सेवन करें।
- सुबह के नाश्ते में पोहा, दलिया, ओट्स, हरि सब्जियों को शामिल करें।
- दोपहर के खाने में रोटी, दाल, हरि सब्जियों का सेवन करें, कैल्शियम के लिए बटर, दहीं और मक्खन का सेवन करें।
- कब्ज़ और अपच की समस्या दूर करने के लिए फाइबर युक्त खाना खाएं।
प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए इसके लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें|
किन चीजों से बचें? (Foods to Avoid)
- कीवी, पपीता, पाइनेप्पल जैसे फलों के सेवन से परहेज़ करें।
- मछली में अधिक मात्रा में मरकरी हो सकती है इसलिए खाने से बचें।
- चाई और कॉफी जैसे कैफीनयुक्त पदार्थों से दूर रहें।
- इसके अलावा कच्चा दूध, अधपका मांस खाने से दूर रहें।
हाइड्रेशन का महत्व (Importance of Staying Hydrated)
- अपच की समस्या से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है।
- यह भ्रृण के चारों ओर एमनियोटिक द्रव बनाने में मदद करता है।
- शरीर की अशुद्धियों को भी बहार निकलने में मदद मिलती है, इसलिए गर्भावस्था के दूसरे महीने हर दिन 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए।
डॉक्टर से कब संपर्क करें? (When to Consult a Doctor)
1. असामान्य लक्षण (Unusual Symptoms): गर्भावस्था के दौरान हाथ, पैर में सूजन होना आम बात है लेकिन चेहरे पर भी सूजन हो, सिर दर्द चक्कर आ रहे हो, त्वचा में बहुत ज्यादा खुजली हो रही हो तो यह असामान्य लक्षण है। इसके लिए डॉक्टर का संपर्क करें।
2. अचानक दर्द या रक्तस्राव (Sudden Pain or Bleeding): गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को स्पॉटिंग होती है हालांकि 1 दिन से ज्यादा ब्लीडिंग होने पर और साथ पेट दर्द होने पर अनदेखी न करें। पेट के एक या दोनों तरफ दर्द हो तो यह मिसकैरेज या प्रिमैच्योर डिलीवरी के संकेत हो सकते हैं ऐसे में तुरंत हीं डॉक्टर से परामर्श करें।
3. अन्य स्वास्थ्य समस्याएं (Other Health Concerns)
लंबे समय तक धूंधला दिखें, 1 दिन से ज्यादा बुखार रहे, 100 डिग्री फैरेनहाइट से ज्यादा बुखार हो, मसूड़ों से लगातार खून आ रहे हो तो तुरंत हीं डॉक्टर से संपर्क करें
गर्भावस्था में पति और परिवार का समर्थन (Role of Husband and Family in Pregnancy)
1. मानसिक और भावनात्मक समर्थन (Mental and Emotional Support): गर्भावस्था एक नाज़ुक पर होता है, ऐसे में महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव आते हैं, जिसका असर महिला के मूड पर भी पड़ता है। ऐसे में उसे मानसिक और भावनात्मक समर्थन करें। परिवार में तनावपूर्ण स्थिति पैदा न हो उसका खास ध्यान रखें।
2. घर के कामों में मदद (Helping with Household Work) : गर्भावस्था की स्थिति में कुछ काम करने में समस्या हो सकती है। ऐसे घर कामों उनका हाथ बटाएं। थकावट और कमजोरी की स्थिति में उन्हें समझे और उनके कामों में मदद करें।
3. डॉक्टर के अपॉइंटमेंट में शामिल होना (Attending Doctor Visits): गर्भावस्था की स्थिति में नियमित रूप से डॉक्टर के पास आना जाना रहता है। ऐसे में उनके चेकअप दौरान उनके साथ रहे और होंसला दे।
निष्कर्ष
गर्भावस्था के पहले महीने में दिखने वाले लक्षण भ्रमित करने वाले होते हैं। दूसरे महीने (2 Month Pregnancy Symptoms in Hindi) में दिखने वाले लक्षण पहले महीने की तुलना में अलग होते हैं। जैसे जैसे समय बीतता है लक्षण भी बढ़ने लगते हैं। गर्भावस्था का दूसरा महीना नाजुक होने के साथ बहुत ही महत्वपूर्ण भी होता है। इस महीने गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों का विकास शुरू हो जाता है।
और पढ़े :
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
2 महीने की गर्भावस्था में क्या लक्षण होते हैं?
मोर्निग सिकनेस, कुछ चीजें खाने का मन करना, अचानक खाने से अरूचि हो जाना, स्तनों में संवेदनशीलता, मूड स्विंग्स, थकान, बार बार पेशाब आना, पेट पर सूजन इत्यादि लक्षण देखने मिलते हैं।
2 महीने की गर्भावस्था में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
मसूड़ों से लगातार खून आ रहा हो, 1 दिन से ज्यादा बुखार हो, धुंधला दिखे, सिर दर्द, पेट में दर्द होना, अचानक से ब्लीडिंग शुरू हो जाना, पूरे शरीर में खुजली और रैशेज हो तो तुरंत हीं डॉक्टर से मिलना चाहिए।
क्या 2 महीने की गर्भावस्था में पेट दिखने लगता है?
गर्भावस्था के दूसरे महीने गर्भाशय फैलने लगता है लेकिन इस दौरान पेट पर कोई असर नहीं दिखाई देता।
2 महीने की गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए?
दूसरे महीने की गर्भावस्था में चुकंदर, पालक, हरि सब्जियां, ओट्स, पोहा, दूध, दहीं, रोटी, दाल, मक्खन, बटर, स्प्राउट्स, खिचड़ी, राइस, पनीर खाना चाहिए।
2 महीने की गर्भावस्था में कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
गर्भावस्था के दूसरे महीने अल्ट्रासाउंड, संयुक्त स्क्रीनिंग टेस्ट, आनुवंशिक जांच, ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवाने चाहिए।
2 महीने की गर्भावस्था में एसिडिटी क्यों होती है?
गर्भावस्था के दूसरे महीने शरीर में प्रोजेस्टेरोन और रिलैक्सिन हार्मोन बनता है। जिसकी वजह से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और एसिडिटी की दिक्कते होने लगती है।
क्या 2 महीने की गर्भावस्था में व्यायाम करना सुरक्षित है?
गर्भावस्था के दूसरे महीने में हल्का व्यायाम कर सकते हैं इसके अलावा रोज 30 मिनट की वॉक भी फायदेमंद है। हालांकि किसी भी तरह के व्यायाम करने से डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।