Female Infertility

Hysteroscopy in Hindi: हिस्टेरोस्कोपी कब करानी चाहिए? प्रक्रिया और लाभ

हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy) एक आधुनिक जांच और उपचार प्रक्रिया है, जिससे महिला के गर्भाशय (Uterus) के अंदर की समस्याओं को सीधे देखा जाता है, और ठीक किया जाता है।

अगर गर्भधारण में समस्या, बार-बार गर्भपात, असामान्य ब्लीडिंग या बांझपन हो, तो डॉक्टर हिस्टेरोस्कोपी की सलाह देते हैं।

Dr. Rashmi Prasad (25+ वर्षों का अनुभव) द्वारा Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna में हिस्टेरोस्कोपी और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सुरक्षित तरीके से की जाती है।

हिस्टेरोस्कोपी क्या है? (Hysteroscopy in Hindi)

हिस्टेरोस्कोपी जिसका उपयोग बच्चेदानी की समस्याओं के निदान या उपचार के लिए किया जाता है, इस प्रक्रिया में एक पतली ट्यूब का उपयोग किया जाता है, जिसके सिरे पर छोटा कैमरा और लाइट लगी होती है। इसे पेल्विक एरिया के माध्यम से गर्भाशय के अंदर डाला जाता है।

यह प्रक्रिया खासतौर पर उन महिलाओं के लिए उपयोगी होती है, जो लंबे समय से गर्भधारण में असफल हो रही हैं।

हिस्टेरोस्कोपी के प्रकार (Types of Hysteroscopy in Hindi)

1. डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी (Diagnostic Hysteroscopy)

गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं की जांच करने के लिए डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी की जाती है। गर्भधारण में दिक्कत, बार-बार गर्भपात होना, मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग होना जैसी स्थितियों में इस जांच की सलाह दी जाती है।

2. ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी (Operative Hysteroscopy)

जब डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी के दौरान गर्भाशय के अंदर कोई असामान्य स्थिति पाई जाती है, तो उसके इलाज के लिए ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी की जाती है।

हिस्टेरोस्कोपी कब करानी चाहिए? (When to Do Hysteroscopy in Hindi)

हिस्टेरोस्कोपी की सलाह डॉक्टर तब देते हैं, जब गर्भाशय (बच्चेदानी) से जुड़ी किसी समस्या के कारण गर्भधारण में दिक्कत, बार-बार गर्भपात या असामान्य ब्लीडिंग हो रही हो।

निम्न स्थितियों में हिस्टेरोस्कोपी करानी चाहिए:

  1. जब लंबे समय से गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो
  2. गर्भाशय की बनावट में असामान्यता का शक हो
  3. एक से अधिक बार गर्भपात हो चुका हो
  4. मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग हो रही हो
  5. बांझपन (Infertility) के कारण का पता लगाने के लिए
  6. पेल्विक एरिया में लगातार दर्द रहता हो

👉 अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण हैं, तो अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से समय पर जांच कराना जरूरी होता है।

हिस्टेरोस्कोपी कैसे की जाती है? (Hysteroscopy Procedure in Hindi )

हिस्टेरोस्कोपी आमतौर पर पीरियड्स खत्म होने के बाद, पहले सप्ताह में की जाती है, ताकि गर्भाशय के अंदर की स्थिति साफ दिखाई दे। यह प्रक्रिया डॉक्टर की निगरानी में सुरक्षित तरीके से की जाती है।

तैयारी (Preparation): प्रक्रिया शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज को रिलैक्स करने के लिए हल्का एनेस्थीसिया दे सकते हैं।

प्रक्रिया (Procedure): सबसे पहले पेल्विस की जांच की जाती है, जिसके बाद हिस्टेरोस्कोप डालने के लिए गर्भाशय ग्रीवा को चौड़ा किया जाता है। डॉक्टर हिस्टेरोस्कोप को योनि के जरिए गर्भाशय में डालते हैं।

रिकवरी (Recovery): प्रक्रिया के बाद कुछ समय तक हल्का दर्द या ब्लीडिंग होना सामान्य माना जाता है।
अधिकांश महिलाएं 1–2 दिन में अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौट सकती हैं।

हिस्टेरोस्कोपी के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Hysteroscopy in Hindi)

हिस्टेरोस्कोपी आमतौर पर एक सुरक्षित और सामान्य मेडिकल प्रक्रिया मानी जाती है। फिर भी, किसी भी जांच या उपचार की तरह इसके बाद कुछ हल्के साइड इफेक्ट्स देखे जा सकते हैं.

हिस्टेरोस्कोपी के बाद निम्न साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं:

⚠ प्रक्रिया के दौरान हल्का एनेस्थीसिया दिया जाता है, इसलिए कुछ समय तक मरीज को निगरानी में रखा जाता है

⚠ प्रक्रिया के बाद थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है।

⚠ कुछ महिलाओं को पेल्विक एरिया में हल्की सूजन या असहजता महसूस हो सकती है।

गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में थोड़ी देर के लिए असुविधा या जलन हो सकती है।

⚠ प्रक्रिया के बाद हल्की ऐंठन और थोड़ा ब्लीडिंग होना सामान्य माना जाता है।

हिस्टेरोस्कोपी ट्रीटमेंट की लागत क्या है? (Hysteroscopy Treatment Cost)

हिस्टेरोस्कोपी की लागत कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे कि डॉक्टर का अनुभव, प्रक्रिया का प्रकार (डायग्नोस्टिक या ऑपरेटिव), और उपयोग किए जाने वाले आधुनिक मेडिकल उपकरण
इसके अलावा, अस्पताल की सुविधा और मरीज की स्थिति के अनुसार भी खर्च में थोड़ा फर्क हो सकता है।

👉 आमतौर पर हिस्टेरोस्कोपी ट्रीटमेंट की औसत लागत ₹18,000 से ₹25,000 के बीच रहती है।

निष्कर्ष

Hysteroscopy in Hindi को समझना उन महिलाओं के लिए जरूरी है, जो गर्भधारण, बार-बार गर्भपात या असामान्य ब्लीडिंग से परेशान हैं। समय पर हिस्टेरोस्कोपी कराने से बड़ी सर्जरी से बचा जा सकता है और pregnancy के chances बेहतर हो सकते हैं।

👉 यदि आप हिस्टेरोस्कोपी से जुड़ी सही जानकारी या इलाज की तलाश में हैं, तो पटना में IVF Hospital in Patna के लिए Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre से संपर्क करें।

यहाँ Dr. Rashmi Prasad (25+ वर्षों का अनुभव) द्वारा हिस्टेरोस्कोपी और संबंधित उपचार आधुनिक तकनीक से सुरक्षित तरीके से किए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या हिस्टेरोस्कोपी के बाद गर्भधारण संभव है?

हाँ, कई मामलों में हिस्टेरोस्कोपी के बाद pregnancy के chances बेहतर हो जाते हैं,
खासकर जब गर्भाशय में पॉलिप, फाइब्रॉइड हटाने के बाद ।

हिस्टेरोस्कोपी के कितने दिन बाद पीरियड आता है?

अधिकतर महिलाओं को 1 से 3 सप्ताह के अंदर पीरियड्स आ जाते हैं। कुछ मामलों में 4–6 सप्ताह तक भी समय लग सकता है।

हिस्टेरोस्कोपी के बाद क्या नहीं करना चाहिए?

डॉक्टर की सलाह के अनुसार:
1. 4–6 सप्ताह तक सेक्स से परहेज
2. टैम्पॉन या डूश का उपयोग न करें
3. भारी वजन उठाने से बचें

हिस्टेरोस्कोपी के बाद क्या खाना चाहिए?

1. पहले 1–2 दिन: हल्का भोजन (दलिया, सूप, फल)
2. इसके बाद: संतुलित आहार (सब्जियाँ, फल, प्रोटीन)
3. पानी ज्यादा पिएँ और कब्ज से बचें

क्या हिस्टेरोस्कोपी सुरक्षित है?

हाँ, हिस्टेरोस्कोपी एक सुरक्षित और आमतौर पर की जाने वाली प्रक्रिया है।

Patna में हिस्टेरोस्कोपी कहाँ करानी चाहिए?

हिस्टेरोस्कोपी हमेशा अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ और सुविधायुक्त फर्टिलिटी सेंटर में करानी चाहिए।
Patna में Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre में Dr. Rashmi Prasad (25+ वर्षों का अनुभव) द्वारा हिस्टेरोस्कोपी सुरक्षित तरीके से की जाती है।

Dr. Rashmi Prasad

Dr. Rashmi Prasad is a highly respected infertility and gynecology specialist with over 25 years of experience. As Director of Diwya Vatsalya Mamta IVF Centre, she is dedicated to helping couples achieve their dream of parenthood. Dr. Prasad holds an MD in Infertility and Gynecology, along with a Postgraduate Diploma in Assisted Reproductive Technology (ART) from Schleswig-Holstein, Germany. Her expertise covers infertility, IVF, pregnancy care, and male infertility, making her a trusted leader in reproductive health. Dr. Prasad has received several honors, including the Asia’s Greatest Award (2017), Icon of Bihar (2013), National Fertility Award (2022), and Mirchi Excellence Award (2024).

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