Female Infertility

Hyperthyroidism in Hindi: लक्षण, कारण, इलाज और Fertility पर असर

संक्षेप में (Quick Answer): Hyperthyroidism (हाइपरथायरॉइडिज्म) थायराइड ग्रंथि की ऐसी स्थिति है जब ग्रंथि ज़रूरत से ज्यादा thyroid hormones बनाती है। मुख्य लक्षण — अचानक वज़न घटना, दिल की धड़कन तेज़ होना, गर्मी बर्दाश्त न होना, हाथों में कंपकंपी, चिड़चिड़ापन और मासिक धर्म अनियमित होना। Fertility पर असर: untreated hyperthyroidism महिलाओं में ovulation गड़बड़ा सकता है, IVF/IUI की success rate घटा सकता है, और पुरुषों में sperm quality प्रभावित कर सकता है। IVF/IUI शुरू करने से पहले TSH संतुलित करना ज़रूरी है। — Dr. Rashmi Prasad, Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna

अंतिम अपडेट: 15 July, 2026 · Dr. Rashmi Prasad द्वारा समीक्षित

संक्षेप मेंहाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) वो स्थिति है जिसमें थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। सबसे आम कारण ग्रेव्स डिज़ीज़ है, जो लगभग 70-80% मामलों में देखा जाता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों में यह फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है — इसलिए IVF या प्राकृतिक गर्भधारण की कोशिश से पहले थायराइड टेस्ट करवाना जरूरी माना जाता है। Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna में Dr. Rashmi Prasad (MBBS, DGO, DNB, PG-ART — University of Kiel, Germany, 25+ साल अनुभव) हर मरीज की थायराइड रिपोर्ट देखकर ही आगे का इलाज तय करती हैं।

अगर किसी का वजन बिना कोशिश के लगातार घट रहा हो, दिल की धड़कन बेवजह तेज रहती हो, या हाथ कांपते हों — तो यह सिर्फ थकान या तनाव नहीं, हाइपरथायरायडिज्म का संकेत हो सकता है। बहुत से लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर तब जब वे संतान की योजना बना रहे हों — जबकि थायराइड की गड़बड़ी सीधे गर्भधारण की संभावना पर असर डाल सकती है।

हाइपरथायरायडिज्म क्या है?

गले के सामने वाले हिस्से में एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है जिसे थायराइड ग्रंथि कहते हैं। यह ग्रंथि T3 और T4 नामक हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और हृदय गति को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है और अधिक हार्मोन बनाने लगती है, तो इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है।

इसे आसान शब्दों में समझें — जैसे गाड़ी खड़ी हो लेकिन उसका इंजन तेज रफ्तार से घूम रहा हो, वैसे ही हाइपरथायरायडिज्म में शरीर आराम से बैठा होने पर भी अंदर ही अंदर थकता रहता है। यही वजह है कि वजन घटने, दिल तेज’ धड़कने और थकान जैसे लक्षण एक साथ दिखते हैं।

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण अक्सर इतने आम लगते हैं कि लोग इन्हें थकान या तनाव समझकर टाल देते हैं। नीचे दिए गए लक्षणों पर ध्यान दें:

अचानक वजन कम होना

अच्छी डाइट और पूरी भूख होने के बावजूद वजन तेजी से घटना।

💓

दिल की धड़कन तेज’ होना

बैठे-बैठे भी दिल जोर से धड़कने का अहसास होना।

🌡

गर्मी बर्दाश्त न होना

आपको ज्यादा पसीना आए और गर्मी सही न लगे।

🤚

हाथों में कंपकंपी

हल्का कांपना महसूस होना।

😰

चिड़चिड़ापन और बेचैनी

बिना वजह घबराहट महसूस होना।

💪

मांसपेशियों में कमजोरी

सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल लगे।

📅

मासिक धर्म अनियमित

पीरियड्स हल्के या महीनों तक मिस होना।

👁

गर्दन में सूजन (गॉइटर)

थायराइड बढ़ने से गर्दन के निचले हिस्से में सूजन।

हर मरीज में सभी लक्षण एक साथ नहीं दिखते।

TSH, T3 और T4 की सामान्य रेंज क्या होती है?

थायराइड की जांच में तीन मुख्य टेस्ट होते हैं। नीचे दी गई रेंज एक सामान्य वयस्क के लिए है — गर्भवती महिलाओं में यह अलग हो सकती है, इसलिए अपनी रिपोर्ट हमेशा डॉक्टर को दिखाएं।

टेस्टसामान्य रेंजHyperthyroidism में
TSH0.4 – 4.0 mIU/Lसामान्य से कम (अक्सर 0.1 से नीचे)
Free T40.8 – 1.8 ng/dLसामान्य से ज्यादा
Free T32.3 – 4.2 pg/mLसामान्य से ज्यादा
TSH – गर्भावस्था (1st trimester)0.1 – 2.5 mIU/L
ध्यान दें: लैब के हिसाब से रेंज थोड़ी अलग हो सकती है। रिपोर्ट पर छपी हुई reference range को हमेशा पहले देखें।

हाइपरथायरायडिज्म के कारण

  • ग्रेव्स डिज़ीज़ — सबसे आम कारण, लगभग 70-80% मामलों में।
  • थायराइड नोड्यूल्स — गंथियों में गांठें बनना।
  • थायरॉइडाइटिस — सूजन से स्टोर हुआ हार्मोन रिसना।
  • आयोडीन की अधिकता — आयोडीन युक्त खाने-सप्लीमेंट ज्यादा लेना।

Hyperthyroidism और Hypothyroidism में क्या फर्क है?

Hyperthyroidism में थायराइड ज्यादा काम करता है और वजन घटता है, जबकि Hypothyroidism में थायराइड धीमा काम करता है और वजन बढ़ता है। दोनों ही स्थितियां पीरियड्स और फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं।

हाइपरथायरायडिज्म की जटिलताएं

अगर हाइपरथायरायडिज्म का इलाज समय पर न हो, तो यह शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर असर डाल सकता है।

  • दिल की समस्याएं — अनियंत्रित हृदय गति (एट्रियल फिब्रिलेशन), उच्च रक्तचाप, हार्ट फेल्योर का बढ़ा हुआ जोखिम।
  • हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) — लंबे समय तक अधिक थायराइड हार्मोन कैल्शियम अवशोषण को प्रभावित करता है, जिससे हड्डियां पतली और नाजुक हो जाती हैं।
  • थायराइड स्टॉर्म (Thyroid Storm) — दुर्लभ लेकिन जानलेवा स्थिति जिसमें बहुत तेज बुखार, अत्यधिक हृदय गति और भ्रम की स्थिति होती है।
  • ग्रेव्स ऑफ्थैल्मोपैथी — आंखों बाहर निकलना, सूजन, दोहरी दृष्टि — ग्रेव्स डिज़ीज़ में अक्सर।
  • प्रजनन जटिलताएं — बार-बार गर्भपात, समय से पहले प्रसव, कम वज़न के शिशु का जन्म, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का जोखिम।

Fertility और IVF पर असर

थायराइड की गड़बड़ी सिर्फ वजन या चिड़चिड़ापन तक सीमित नहीं रहती, यह सीधे प्रजनन क्षमता को भी छूती है।

👩

महिलाओं में

ओव्युलेशन प्रभावित, गर्भपात का जोखिम बढ़ता है।

👨

पुरुषों में

स्पर्म क्वालिटी और गतिशीलता कम हो सकती है।

TSH संतुलित न होने पर डॉक्टर पहले उसे ठीक करते हैं, उसके बाद ही IVF/IUI शुरू होता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए हमारा विस्तृत — Thyroid in Pregnancy in Hindi — पढ़ें।

गर्भावस्था में Hyperthyroidism

गर्भावस्था के दौरान थायराइड हार्मोन बच्चे के मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम के विकास के लिए जरूरी होते हैं — इसलिए इस दौरान थायराइड का सही स्तर बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

  • अनियंत्रित hyperthyroidism से गर्भपात, समय से पहले प्रसव, और कम वज़न के शिशु का जोखिम बढ़ता है।
  • पहली तिमाही में हल्का hyperthyroidism सामान्य हो सकता है (HCG के प्रभाव से) — इसे इलाज की जरूरत नहीं होती।
  • Anti-thyroid दवाइयां गर्भावस्था में सुरक्षित होती हैं लेकिन खुराक सावधानी से तय की जाती है — पहली तिमाही में PTU और उसके बाद methimazole को प्राथमिकता दी जाती है।
  • रेडियोएक्टिव आयोडीन गर्भावस्था और स्तनपान में पूरी तरह वर्जित है।
  • नियमित TSH मॉनिटरिंग — गर्भावस्था में हर 4-6 सप्ताह में जांच जरूरी है।

रोकथाम

  • आयोडीन संतुलन — सी-फूड संतुलित मात्रा में लें।
  • तनाव कम — योग और मेडिटेशन।
  • धूंर्पान से परहेज — खतरा बढ़ाता है।
  • नियमित TSH जांच — पारिवारिक इतिहास हो तो।

Hyperthyroidism में क्या खाएं और क्या न खाएं

खाना अकेले hyperthyroidism ठीक नहीं कर सकता, लेकिन कुछ चीजें लक्षणों को बढ़ा सकती हैं और कुछ शरीर को सपोर्ट देती हैं।

✅ ये खाएं

  • क्रूसीफेरस सब्जियां (पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकली) — सीमित मात्रा में
  • प्रोटीन युक्त भोजन (दालें, अंडा, चिकन) — मांसपेशियों की कमजोरी कम करने के लिए
  • कैल्शियम और विटामिन D — हड्डियों की रक्षा के लिए (दूध, दही, हरी सब्जियां)
  • बेरीज और अखरोट — एंटीऑक्सीडेंट के लिए
  • पर्याप्त पानी — मेटाबॉलिज्म तेज़ होने से डिहाइड्रेशन का खतरा

❌ इनसे बचें

  • आयोडीन युक्त फूड ज्यादा मात्रा में — kelp, समुद्री शैवाल, आयोडाइज्ड नमक अधिक
  • कैफीन — चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक (दिल की धड़कन बढ़ाते हैं)
  • प्रोसेस्ड और तली-भुनी चीजें — inflammation बढ़ाती हैं
  • अत्यधिक शराब
  • बिना डॉक्टर की सलाह के मल्टीविटामिन या हर्बल सप्लीमेंट

निदान और इलाज

T3, T4, TSH टेस्ट से निदान होता है। इलाज में एंटी-थायरॉइड दवाइयां, रेडियोएक्टिव आयोडीन, या सर्जरी शामिल हो सकती है। पुरुषों में जुड़ी Male Infertility Treatment भी पढ़ें।

किस डॉक्टर से मिलें?

  • Endocrinologist — थायराइड के विशेषज्ञ, प्रारंभिक निदान और इलाज के लिए।
  • Gynecologist — अगर पीरियड्स की अनियमितता या गर्भधारण में समस्या हो।
  • Fertility Specialist — अगर आप IVF/IUI की तैयारी कर रहे हैं और थायराइड की समस्या है।
  • Cardiologist — अगर दिल की धड़कन में गड़बड़ी या हृदय संबंधी लक्षण हों।
  • Ophthalmologist — ग्रेव्स ऑफ्थैल्मोपैथी में आंखों की देखभाल के लिए।

कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं? (Red Flags)

निम्न लक्षण दिखें तो देर न करें — तुरंत मेडिकल सहायता लें:

  • तेज बुखार (103°F+) के साथ अनियंत्रित हृदय गति — Thyroid Storm का संकेत, यह जानलेवा हो सकता है।
  • सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द
  • अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी या बेहोशी
  • आंखों में तेज दर्द या दृष्टि में बदलाव
  • गर्भावस्था में TSH बहुत कम होना

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Hyperthyroidism in Hindi – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Hyperthyroidism और Hypothyroidism में क्या फर्क है?

Hyperthyroidism में थायराइड ग्रंथि ज्यादा हार्मोन बनाती है और वजन घटता है, जबकि Hypothyroidism में हार्मोन कम बनता है और वजन बढ़ता है। दोनों ही स्थितियां पीरियड्स और फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए TSH टेस्ट से सही जांच जरूरी है।

पुरुषों में Hyperthyroidism fertility को कैसे प्रभावित करता है?

पुरुषों में Hyperthyroidism स्पर्म की संख्या और गतिशीलता दोनों को कम कर सकता है, जिससे नेचुरल कंसीव में समय ज्यादा लग सकता है। सही इलाज से यह असर काफी हद तक कम हो जाता है।

Hyperthyroidism में वजन बढ़ भी सकता है?

आमतौर पर वजन घटता है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में मेटाबॉलिज्म बढ़ने की वजह से भूख इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि इंसान जरूरत से ज्यादा खाने लगता है, जिससे वजन बढ़ सकता है।

क्या Hyperthyroidism का इलाज पूरी तरह से संभव है?

सही इलाज से थायराइड का स्तर सामान्य हो सकता है। एंटी-थायरॉइड दवाइयां, रेडियोएक्टिव आयोडीन, या कुछ मामलों में सर्जरी जैसे विकल्प मौजूद हैं। सही डॉक्टर की निगरानी सबसे जरूरी है।

IVF या IUI शुरू करने से पहले थायराइड टेस्ट क्यों जरूरी है?

थायराइड का स्तर संतुलित न होने पर भ्रूण स्थापना और गर्भधारण की संभावना पर असर पड़ सकता है। इसलिए Diwya Vatsalya Mamta में IVF/IUI शुरू करने से पहले ही TSH जांच करवाई जाती है, ताकि सफलता की संभावना को बेहतर बनाया जा सके।

क्या चाय या कॉफी Hyperthyroidism को बढ़ा सकती है?

चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन थायराइड ग्रंथि को सीधे तो प्रभावित नहीं करती, लेकिन यह दिल की धड़कन और बेचैनी जैसे लक्षणों को बढ़ा सकती है। इसलिए हाइपरथायरायडिज्म में इनकी मात्रा सीमित रखना बेहतर है।

क्या Hyperthyroidism परिवार में चलता है?

ग्रेव्स डिज़ीज़ जैसी ऑटोइम्यून स्थितियों में पारिवारिक इतिहास एक भूमिका निभाता है। अगर परिवार में किसी को थायराइड की समस्या रही है, तो साल में एक बार TSH टेस्ट करवाना समझदारी है।

गर्भावस्था में Hyperthyroidism कितना खतरनाक है?

अनियंत्रित hyperthyroidism से गर्भपात, समय से पहले प्रसव, कम वज़न के शिशु का जन्म और गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का जोखिम बढ़ता है। सही समय पर इलाज और नियमित TSH मॉनिटरिंग से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है। गर्भावस्था में रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी वर्जित है — केवल anti-thyroid दवाइयां सुरक्षित मानी जाती हैं।

Hyperthyroidism में क्या नहीं खाना चाहिए?

अत्यधिक आयोडीन वाले भोजन (kelp, समुद्री शैवाल, आयोडाइज्ड नमक अधिक), कैफीन युक्त पेय (चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक), प्रोसेस्ड और तली-भुनी चीजें, अत्यधिक शराब और बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन युक्त सप्लीमेंट लेने से बचें।

IVF cycle शुरू करने से कितने महीने पहले TSH ठीक होना चाहिए?

आदर्श रूप से IVF शुरू करने से 2-3 महीने पहले TSH 2.5 mIU/L से नीचे स्थिर होना चाहिए। इससे anti-thyroid दवाइयों की खुराक settle हो जाती है और इम्प्लांटेशन तथा early pregnancy के दौरान थायराइड का स्तर बच्चे के विकास के लिए अनुकूल रहता है।

क्या Hyperthyroidism की दवाइयां जीवनभर लेनी पड़ती हैं?

नहीं, ज्यादातर मामलों में एंटी-थायराइड दवाइयां 12-18 महीने के कोर्स के लिए दी जाती हैं। कुछ मरीजों में इलाज बंद करने के बाद भी हार्मोन स्तर सामान्य रहता है। लेकिन ग्रेव्स डिज़ीज़ में recurrence संभव है, इसलिए इलाज बंद करने के बाद भी नियमित TSH जांच जरूरी है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है — यह किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है — किसी भी इलाज, दवा या निर्णय से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें। Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna में मुफ़्त परामर्श के लिए +91 97710 38137 पर संपर्क करें।

Dr. Rashmi Prasad - Senior IVF Specialist

Dr. Rashmi Prasad

Director & Senior IVF Specialist · 25+ Years Experience

MBBS DGO DNB PG-ART · University of Kiel, Germany 🇩🇪

🏥 Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna, Bihar

Dr. Rashmi Prasad is one of Bihar’s most trusted infertility and gynecology specialists, with over 25 years of clinical experience. As Director of Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre (Patna), she has helped thousands of couples achieve parenthood through ethical, personalized IVF and reproductive care. Her advanced training in Reproductive Science from University of Kiel, Germany brings international fertility standards to patients across Bihar.

🏆 Awards & Recognition

  • 🏆 Asia’s Greatest IVF Specialist — 2017
  • 🎉 National Fertility Award — 2022
  • Health Icon of Bihar — 2025
  • 🏅 Icon of Bihar — Outlook 2013
  • 🏅 IFS-Meyer Achievers Award
  • 🏅 Bihar Healthcare Excellence Award
  • 🏆 Mirchi Excellence Award — 2024

🩺 Specializations

IVF Treatment ICSI IUI Male Infertility High-Risk Pregnancy Gynaecology Laparoscopic Surgery

Dr. Rashmi Prasad

Dr. Rashmi Prasad is one of Bihar’s most trusted infertility and gynaecology specialists, with over 25 years of clinical experience. As Director of Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna, she has helped thousands of couples achieve parenthood through ethical, personalised IVF and reproductive care. She holds an MBBS, DGO and DNB, along with a PG-ART (Post Graduate in Assisted Reproductive Technology) from the University of Kiel, Germany. Her expertise covers IVF, ICSI, IUI, male infertility, high-risk pregnancy and laparoscopic surgery. Dr. Prasad has received several honours, including Asia’s Greatest IVF Specialist (2017), Icon of Bihar (2013), National Fertility Award (2022), Health Icon of Bihar (2025) and the Mirchi Excellence Award (2024).

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