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IVF से पहले कौन से Test ज़रूरी हैं? — Patna Pre-IVF Workup Guide

संक्षेप में (Quick Answer): IVF शुरू करने से पहले पति और पत्नी दोनों की जांच ज़रूरी है। महिला — AMH, FSH/LH, TSH, प्रोलैक्टिन, ब्लड शुगर, ट्रांसवैजिनल अल्ट्रासाउंड; पुरुष — सीमेन एनालिसिस। साथ में दोनों की इंफेक्शन स्क्रीनिंग। ये जांचें आमतौर पर 1–3 हफ्ते में पूरी हो जाती हैं।

जब कोई दंपति IVF की ओर कदम बढ़ाता है, तो सबसे पहला सवाल यही आता है — “इलाज कब शुरू होगा?” लेकिन सच्चाई यह है कि IVF की सफलता काफी हद तक उस जांच पर टिकी होती है जो इलाज शुरू होने से पहले होती है। यही जांच डॉक्टर को बताती है कि आपके शरीर में समस्या कहां है और कौन सा इलाज आपके लिए सबसे सही रहेगा।

बहुत से दंपति इस चरण को हल्के में ले लेते हैं, यह सोचकर कि “जांच तो बस खानापूर्ति है।” लेकिन यह सोच महंगी पड़ सकती है। अगर किसी महिला का थायरॉयड अनियंत्रित हो और IVF बिना उसे ठीक किए शुरू हो जाए, तो सफलता की संभावना कम हो जाती है। इसीलिए यह जानना ज़रूरी है कि IVF से पहले कौन सी जांचें होती हैं और क्यों।

Pre-IVF Workup क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?

Pre-IVF Workup एक चरण-दर-चरण मेडिकल जांच है जिसमें पति और पत्नी दोनों की प्रजनन सेहत को व्यवस्थित ढंग से जांचा जाता है। इसका मकसद सिर्फ़ “रिपोर्ट लेना” नहीं है — इन रिपोर्टों से डॉक्टर एक पूरी तस्वीर बनाते हैं, जो आपके इलाज की नींव बनती है।

इस जांच से डॉक्टर यह समझते हैं — निःसंतानता की असली वजह क्या है (महिला, पुरुष, या दोनों), अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता कैसी है, गर्भाशय भ्रूण को ग्रहण करने के लिए तैयार है या नहीं, और IVF की दवाओं पर शरीर का कैसा असर होगा। इन सब सवालों के जवाब मिलने के बाद ही एक व्यक्तिगत इलाज योजना बनती है।

महिला के लिए ज़रूरी जांचें

1. AMH टेस्ट (ऐंटी-मूलेरियन हार्मोन)

AMH टेस्ट फर्टिलिटी जांच का सबसे महत्वपूर्ण मार्कर माना जाता है। यह एक साधारण ब्लड टेस्ट है जो बताता है कि आपके अंडाशय (ovaries) में अभी कितने अंडाणु बचे हैं — इसे ओवेरियन रिज़र्व कहते हैं। AMH का स्तर डॉक्टर को यह तय करने में मदद करता है कि IVF के दौरान कितनी दवा दी जाए और कितने अंडाणु मिलने की उम्मीद है।

AMH स्तरइसका मतलब
3.0 ng/ml से ऊपरओवेरियन रिज़र्व अच्छा है
1.0 – 3.0 ng/mlसामान्य रिज़र्व
0.5 – 1.0 ng/mlरिज़र्व कम है
0.5 से नीचेरिज़र्व बहुत कम है

एक ज़रूरी बात — AMH सिर्फ़ अंडाणुओं की संख्या बताता है, उनकी गुणवत्ता नहीं। कम AMH का मतलब यह नहीं कि IVF नहीं होगा। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए AMH टेस्ट क्या है पढ़ें, या कम AMH का इलाज देखें।

2. हार्मोनल प्रोफाइल — FSH, LH, एस्ट्राडियॉल

ये तीनों हार्मोन पीरियड के दूसरे या तीसरे दिन जांचे जाते हैं और अंडाशय की पूरी कार्यप्रणाली दिखाते हैं। FSH ओवेरियन रिज़र्व का संकेत देता है; बढ़ा हुआ FSH बताता है कि अंडाशय को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। LH PCOS वाली महिलाओं में अक्सर बढ़ा मिलता है। एस्ट्राडियॉल फॉलिकल के विकास को दर्शाता है। विस्तार से: FSH टेस्ट क्या है

3. थायरॉयड जांच — TSH

थायरॉयड और प्रजनन का गहरा संबंध है, पर इसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। अनियंत्रित थायरॉयड से इम्प्लांटेशन फेल हो सकता है और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए TSH टेस्ट लगभग हर IVF मरीज़ के लिए ज़रूरी है। थायरॉयड असामान्य हो तो पहले उसे संतुलित किया जाता है। अधिक जानें: गर्भावस्था में थायरॉयड

4. प्रोलैक्टिन टेस्ट

प्रोलैक्टिन एक हार्मोन है जो बिना वजह बढ़ जाए तो ओव्यूलेशन रोक सकता है। इसके संकेत हैं — अनियमित या बंद पीरियड, बिना गर्भावस्था के दूध जैसा स्राव, और लंबे समय से गर्भधारण न हो पाना। अधिक जानें: प्रोलैक्टिन टेस्ट

5. ब्लड शुगर टेस्ट — Fasting, HbA1c, Post Meal

डायबिटीज़ और इंसुलिन रेजिस्टेंस — खासकर PCOS वाली महिलाओं में — अंडाणु की गुणवत्ता और भ्रूण विकास को प्रभावित करते हैं। इसीलिए ये जांचें ज़रूरी हैं।

6. CBC और विटामिन D

CBC शरीर की समग्र सेहत देखता है — खासकर खून की कमी (एनीमिया), जो बिहार में महिलाओं में आम है। विटामिन D की कमी भी IVF सफलता को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसकी जांच भी की जाती है।

7. इंफेक्शन स्क्रीनिंग

सुरक्षा के लिए दोनों पार्टनर की HIV, Hepatitis B और C, और VDRL (सिफिलिस) जांच की जाती है। इनका मकसद मां और आने वाले बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अल्ट्रासाउंड और यूटरस की जांच

ट्रांसवैजिनल अल्ट्रासाउंड (TVS)

यह IVF workup का सबसे जानकारीपूर्ण इमेजिंग टेस्ट है। इससे पता चलता है कि गर्भाशय का आकार सामान्य है या नहीं, एंडोमेट्रियल लाइनिंग कैसी है, और अंडाशय में फॉलिकल की स्थिति क्या है। फाइब्रॉयड या सिस्ट भी इसी जांच में दिखते हैं।

एंट्रल फॉलिकल काउंट (AFC)

AFC भी TVS के दौरान ही होता है। इसमें दोनों अंडाशय में छोटे-छोटे फॉलिकल की संख्या गिनी जाती है। AMH के साथ मिलकर यह ओवेरियन रिज़र्व की सबसे सटीक तस्वीर देता है।

AFC संख्यामतलब
15 से ज़्यादाबहुत अच्छा रिज़र्व
8 – 15अच्छा रिज़र्व
5 – 7कम रिज़र्व
5 से कमबहुत कम रिज़र्व

HSG और हिस्टेरोस्कोपी

HSG एक एक्स-रे जांच है जिसमें डाई डालकर देखा जाता है कि फैलोपियन ट्यूब खुली हैं या बंद। विस्तार से: HSG टेस्ट की जानकारी और खर्चहिस्टेरोस्कोपी कुछ खास मामलों में की जाती है — जैसे बार-बार IVF फेल होना या गर्भाशय में संदिग्ध गड़बड़ी।

पुरुष के लिए ज़रूरी जांचें

एक ज़रूरी बात: IVF सिर्फ़ महिला का इलाज नहीं है। लगभग 40–50% मामलों में पुरुष पक्ष भी जिम्मेदार होता है। इसलिए पति की जांच उतनी ही ज़रूरी है जितनी पत्नी की।

1. सीमेन एनालिसिस

यह पुरुष प्रजनन की सबसे बुनियादी और ज़रूरी जांच है। इसमें शुक्राणु की संख्या, गति (motility) और आकार (morphology) देखे जाते हैं।

मापदंडसामान्य रेंज
शुक्राणु संख्या15 मिलियन/ml या ज़्यादा
गति (Motility)40% या ज़्यादा
आकार (Morphology)4% या ज़्यादा सामान्य
मात्रा (Volume)1.5 ml या ज़्यादा

अगर कोई मापदंड कम हो, तो डॉक्टर उसी हिसाब से ICSI जैसी तकनीक चुनते हैं, जिसमें एक स्वस्थ शुक्राणु सीधे अंडाणु में डाला जाता है।

2. स्पर्म DNA फ्रैगमेंटेशन टेस्ट

यह टेस्ट उन मामलों में ज़्यादा ज़रूरी है जहां सीमेन एनालिसिस सामान्य हो पर फिर भी भ्रूण की गुणवत्ता खराब हो या IVF बार-बार फेल हो रहा हो।

3. पुरुष हार्मोनल जांच

खासकर कम शुक्राणु संख्या वाले मामलों में टेस्टोस्टेरोन, FSH, LH और प्रोलैक्टिन जांचे जाते हैं। इससे पता चलता है कि समस्या शुक्राणु बनने में है या हार्मोन में। संबंधित: शुक्राणु संख्या कैसे बढ़ाएं

जेनेटिक टेस्ट — कब और क्यों?

हर IVF मरीज़ को जेनेटिक टेस्ट की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन कुछ खास स्थितियों में डॉक्टर इसे सलाह देते हैं — बार-बार गर्भपात, बार-बार IVF फेल, बहुत कम शुक्राणु संख्या, परिवार में आनुवंशिक बीमारी (जैसे थैलेसीमिया), या ज्यादा उम्र में गर्भधारण। ऐसे मामलों में कैरियोटाइपिंग और PGT उपयोगी होते हैं।

जांच में कितना समय लगता है?

ज़्यादातर मामलों में बेसिक workup 1 से 3 हफ्तों में पूरा हो जाता है। कुछ टेस्ट पीरियड के खास दिनों पर होते हैं (जैसे Day 2–3 पर FSH/LH), इसलिए थोड़ा इंतज़ार करना पड़ सकता है। अगर हिस्टेरोस्कोपी या जेनेटिक टेस्ट ज़रूरी हो, तो समय थोड़ा बढ़ सकता है। IVF की पूरी प्रक्रिया समझने के लिए पढ़ें: IVF क्या है

IVF से पहले जीवनशैली की तैयारी

जांच के साथ-साथ जीवनशैली भी IVF की सफलता को प्रभावित करती है। IVF से कम से कम 2–3 महीने पहले ये बदलाव शुरू करें:

  • डॉक्टर की सलाह पर फोलिक एसिड लेना शुरू करें।
  • धूम्रपान और शराब पूरी तरह बंद करें — ये अंडाणु और शुक्राणु दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें — बहुत ज़्यादा या बहुत कम वजन दोनों नुकसानदेह हैं।
  • नींद पूरी लें और तनाव कम करें।
  • प्रोसेस्ड फूड कम करें; फल, सब्ज़ियां और मेवे जैसा एंटीऑक्सीडेंट-युक्त आहार लें।

पटना और बिहार के दंपतियों के लिए

बिहार में अक्सर दंपति सही जांच कराए बिना सालों तक इलाज करवाते रहते हैं — कभी झोलाछाप के पास, तो कभी अधूरी जानकारी के साथ। सबसे बड़ी गलती यही होती है कि सही और पूरी जांच कभी नहीं होती। दिव्य वात्सल्य ममता फर्टिलिटी सेंटर, पटना में हर दंपति की पूरी और सही जांच पहले की जाती है, ताकि इलाज सही दिशा में शुरू हो। मुज़फ्फरपुर, गया, भागलपुर, दरभंगा जैसे जिलों से भी दंपति यहां आते हैं।

IVF शुरू करने से पहले सही जांच ज़रूरी है

पटना में डॉ. रश्मि प्रसाद से मुफ्त परामर्श बुक करें — सही जांच, सही सलाह।

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निष्कर्ष

IVF एक जटिल पर उम्मीद भरी यात्रा है, और इस यात्रा का सबसे ज़रूरी पहला कदम है — सही और पूरी Pre-IVF Workup। जब आप जानते हैं कि IVF से पहले कौन सी जांचें ज़रूरी हैं और क्यों, तो आप इलाज में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं और सही सवाल पूछ सकते हैं। सही निदान के बिना सबसे आधुनिक तकनीक भी उतनी कारगर नहीं होती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

IVF शुरू करने से पहले कौन सी जांचें होती हैं?

महिला के लिए मुख्य जांचें — AMH, FSH, LH, एस्ट्राडियॉल, TSH, प्रोलैक्टिन, ब्लड शुगर, CBC, विटामिन D, ट्रांसवैजिनल अल्ट्रासाउंड (AFC के साथ), और इंफेक्शन स्क्रीनिंग। पुरुष के लिए — सीमेन एनालिसिस और ज़रूरत पड़ने पर स्पर्म DNA फ्रैगमेंटेशन और हार्मोनल जांच।

IVF workup में कितना समय लगता है?

ज़्यादातर मामलों में बेसिक workup 1 से 3 हफ्तों में पूरा हो जाता है। कुछ टेस्ट पीरियड के खास दिनों पर होते हैं, इसलिए थोड़ा इंतज़ार हो सकता है। हिस्टेरोस्कोपी या जेनेटिक टेस्ट ज़रूरी हो तो समय बढ़ सकता है।

क्या कम AMH होने पर IVF हो सकता है?

हां। कम AMH का मतलब है कि अंडाणु कम हैं — पर “कम” का मतलब “नहीं” नहीं होता। डॉक्टर स्टिम्यूलेशन प्रोटोकॉल को उसी हिसाब से एडजस्ट करते हैं। यह फैसला AMH, AFC, उम्र और समग्र सेहत मिलाकर लिया जाता है।

क्या पति को सच में जांच की ज़रूरत है?

हां, बिल्कुल। लगभग 40–50% निःसंतानता में पुरुष पक्ष भी जिम्मेदार होता है। सीमेन एनालिसिस न्यूनतम जांच है; कुछ मामलों में स्पर्म DNA फ्रैगमेंटेशन और हार्मोनल जांच भी ज़रूरी हो सकती है।

पटना में IVF जांच और इलाज कहां करवाएं?

पटना में दिव्य वात्सल्य ममता फर्टिलिटी सेंटर में डॉ. रश्मि प्रसाद (25+ वर्षों का अनुभव) की देखरेख में पूरी Pre-IVF जांच और इलाज एक ही जगह होता है। बिहार भर से दंपति यहां आते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है — यह किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है — किसी भी इलाज, दवा या निर्णय से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें। Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna में मुफ़्त परामर्श के लिए +91 97710 38137 पर संपर्क करें।

Dr. Rashmi Prasad - Senior IVF Specialist

Dr. Rashmi Prasad

Director & Senior IVF Specialist · 25+ Years Experience

MBBS DGO DNB PG-ART · University of Kiel, Germany 🇩🇪

🏥 Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna, Bihar

Dr. Rashmi Prasad is one of Bihar’s most trusted infertility and gynecology specialists, with over 25 years of clinical experience. As Director of Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre (Patna), she has helped thousands of couples achieve parenthood through ethical, personalized IVF and reproductive care. Her advanced training in Reproductive Science from University of Kiel, Germany brings international fertility standards to patients across Bihar.

🏆 Awards & Recognition

  • 🏆 Asia’s Greatest IVF Specialist — 2017
  • 🎉 National Fertility Award — 2022
  • Health Icon of Bihar — 2025
  • 🏅 Icon of Bihar — Outlook 2013
  • 🏅 IFS-Meyer Achievers Award
  • 🏅 Bihar Healthcare Excellence Award
  • 🏆 Mirchi Excellence Award — 2024

🩺 Specializations

IVF Treatment ICSI IUI Male Infertility High-Risk Pregnancy Gynaecology Laparoscopic Surgery

Dr. Rashmi Prasad

Dr. Rashmi Prasad is one of Bihar’s most trusted infertility and gynaecology specialists, with over 25 years of clinical experience. As Director of Diwya Vatsalya Mamta Fertility Centre, Patna, she has helped thousands of couples achieve parenthood through ethical, personalised IVF and reproductive care. She holds an MBBS, DGO and DNB, along with a PG-ART (Post Graduate in Assisted Reproductive Technology) from the University of Kiel, Germany. Her expertise covers IVF, ICSI, IUI, male infertility, high-risk pregnancy and laparoscopic surgery. Dr. Prasad has received several honours, including Asia’s Greatest IVF Specialist (2017), Icon of Bihar (2013), National Fertility Award (2022), Health Icon of Bihar (2025) and the Mirchi Excellence Award (2024).

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